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तू जीत गई! मैं हार गया हूं "अब पहले वाली बात नहीं है"

"अब पहले वाली बात नहीं है"   जब से तू मेरे साथ नहीं है  अब पहले वाली बात नहीं है  तेरे दिल में अब घर नहीं है  तुझे खोने का अब डर नहीं है  तेरे बिन हम मर जाएंगे  कहने वाला अब कोई नहीं है  रोज रुठना रोज मनाना  संग हंसने वाला कोई नहीं है  जी भरने पर रो दू जब में  तब आंसू पोंछे वो कोई नहीं है खाना खाया या भूखे हो तुम  यह पूछने वाला कोई नहीं है कितनी शामें  छत पर काटी पर पहले वाली शाम नहीं है  तेरे साथ से फेमस थे हम  अब पहले जैसा नाम नहीं है  धूप , छांव हो या बरसाते  अब पहले वाली मौज नहीं है  रातें झटपट कट जाती है  तेरे ख्वाबों की अब फौज नहीं है दिन कटता नहीं पर सालें बीती तेरे आने की अब उमीद नहीं है  तू जीत गई! मैं हार गया हूं  अब तुझको मुझसे प्रीत नहीं है

एक बार आओ तो सही

हेलो ! बहुत मिस करता हूं मेरी जान हर पल आपको। पता है यार जब से आप मुझे छोड़ कर गए हो ऐसे लगता है जैसे मेरी दुनिया ही उजड़ गई हो । मेरी दुनिया ही बर्बाद हो गई हो । सब कुछ तबाह हो गया हो। दिल सूनापन सा हो गया है । ऐसे लगता है जैसे तुम एकदम से मेरे सामने आ जाओगे और मुझे सरप्राइस कर दोगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। दिल बहुत रोता है यार अक्सर आपकी याद में । मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं किस तरह बयान करूं। मेरा सबकुछ उजड़ गया है । जब भी आप से बात करने की कोशिश करता हूं । आपके पास समय नहीं है। आप हमेशा मुझे इग्नोर कर देते हो। आपके लिए पूरी दुनिया से बात करने के लिए टाइम है। पूरी दुनिया से मिलने के लिए टाइम है लेकिन मेरे लिए आपके पास 2 मिनट का भी समय नहीं है कि आप मुझसे दो मिनट बात कर सको। मैं मजबूर हूं बस रो लेता हूं मेरे पास और कोई रास्ता नहीं होता सोचो यार कितना प्यार करता था मैं आपसे। आपको हमेशा अपनी पलकों पर बिठा के रखता था। हमेशा आपकी केयर करता था। उसके बावजूद आप मुझे छोड़ कर चले गए। ऐसा क्या गुनाह कर दिया मेरी जान मैंने कि आपने मुझे इतनी बड़ी सजा दी । सोचो यार। प्लीज अगर वक्त मिले तो बात क...

चाय की टपरी और सिगरेट के सुट्टे...........!

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चाय की टपरी और सिगरेट के सुट्टे...........! बात उन दिनों की है जब मैं अपने बुरे दौर से गुजर रहा था। मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा था कि क्या करूं और क्या नहीं करूं। इस बुरे दौर में एक चीज थी जिसने मेरा पूरा साथ दिया। वो थी सिगरेट । बस सिगरेट और चाय पीने के लिए चाय की टपरी पर चला जाता था। चाय की टपरी पर बैठने के लिए कोई खास जगह तो होती नहीं है। लोहे के खाली ड्रम और वही एक कोना ।  इस बहाने अपने आप को अपनी पुरानी यादों से भी बाहर निकालने का मोका मिल जाता था।  घंटो चाय की टपरी पर बैठ जाता था और मैं यही सोचता था कि किसी एक इंसान के धोका देने से ये दुनिया धोखेबाज नही हैं। जब मैं अच्छा और वफादार हूं तो ये दुनिया भी वैसी ही है जैसा मैं इसको देखता हूं। वैसे भी अभी मेरे पास न कोई काम धंधा था और न कोई नौकरी। जेब में पैसे नही थे । बस पेटीएम में 200 - 300 रू थे । वो भी सोच समझकर खर्च करता था । क्योंकि चाय की टपरी पर जाकर बैठने के लिए भी पैसे चाहिए। फिर भी पॉजिटिव इतना रहता था कि आज ही शोरूम पर जाकर ऑडी खरीद कर ले आऊंगा। एक बार ऐसे ही चाय की टपरी पर जाकर बैठ गया । मेरा चाय की टपरी पर जाकर बैठने...

बहुत याद आते हो बाउजी......!

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बहुत याद आते हो बाउजी......! आपको छोड़कर गए हुए 8 साल हो गए। ऐसा लगता हैं जैसे कल परसों की बात हों😭😭😭😭😭😭  वक्त आया आपके साथ जीवन जीने का तो आप साथ नहीं हो। बहुत कुछ खोया है बाऊजी।  खोने का अफसोस नहीं हैं। आपका बेटा आपके आशीर्वाद से पहले भी राजा था और आज भी राजा ही हैं, बस साथ नही हो तो आप नहीं हों। बाउजी मुझे नहीं पता था आप इस दुनिया की भीड़ में मुझे अकेला छोड़कर चले जाओगे। आंखे नम हो जाती है आपकी याद। दुनिया की भीड़ से दूर अकेले में बैठकर रो लेता हू 😢😢😢😢😢😢😢। भीगी आंखे खुद ही पोंछ लेता हूं। बाऊजी आप जहां भी हो, सुन रहे हो ना, बहुत भावुक हो गया हो आज । बाऊजी आपसे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन फिर भी मैं कहूंगा, एक मोका तो दिया होता मुझे आपके साथ कुछ पल बिताने का। आपकी सेवा करने का। बाऊजी आपकी डांट खाने का, आपके हाथ से मार खाने का बहुत मन करता है । क्यों चले गए आप मुझे छोड़कर। मुझे आज भी विश्वास नहीं होता, कभी कभी ऐसा लगता हैं कि जैसे आप मेरे पास आकर मुझे कहोगे बेटा क्या कर रहा है। कभी कभी तो रो भी नही पता हूं, क्योंकि आंसू पोछने वाला कोई नहीं हैं। बाऊजी आपसे माफी जरूर ...

लिखते लिखते देखो ना यार......

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जिंदगी के सफर में अकेला मुसाफिर बन कर चलता आया हूं। कभी शब्दों का साथ मिला, तो कभी कोरे कागजों को भरता आया हूं। लिखते लिखते देखो ना यार...... किस्मत और मेरा नसीब मुझे किस मोड़ पर ले आया हैं। किसी अंजान शख्स के दिल को छू सकू,  मेरे अल्फाज और मेरा अंदाज कुछ ऐसे रंग लाया हैं। दोस्त कभी थे , कभी न सही। कुछ अपनो ने छोड़ा, तो अनजानों ने थामा ये हाथ सही। जज्बातों का जब जब तूफान उमड़ उठा सीने में, रिसती गई पन्नो पर अरमानों की स्याही सही। सोचता हूं कि अगर मेरी लिखने की आदत न होती तो क्या होता ? क्या मेरे सीने में छुपे दर्द और खुशी को तुमने सुना होता। होठों का क्या है, ये तो झूठ बोलना भी सिख लेते है। काश कभी आंखों में छुपी बातों को तुमने पढ़ा होता आज ये कागज और कलम मेरे हमदर्द बन चुके है। जिनका साथ कभी न छूटे, वो हमसफर बन चुके है। कहते है जिंदगी बड़ी लंबी हैं, अकेले गुजरना आसान नहीं हैं,  यूंही इसी तरह लिखता रहूं, जीत सकूं आपके दिल को, बस यही एक ख्वाहिश हैं मेरी।

तुमसे वफादार तो मेरी सिगरेट निकली यार.......................

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 सच कहूं तो जब वो मुझे छोड़कर गई थी तो ऐसा लगता था जैसे जीने की उम्मीद ही खत्म हो गई हो। दिल बार बार उस से बात करने को तड़पता , और मैं उसे जब भी कॉल करता एक ही आवाज मेरे कानो में गूंजती "जिस व्यक्ति से आप बात करना चाहते हैं, वो अभी दूसरी कॉल पर व्यस्त है, कृपया कुछ देर बाद ट्राई करे। बहुत रोता था उसकी याद में। मैं जिस इंसान से अपनी जान से ज्यादा महोब्बत करता हूं आज उसके पास अब मेरे लिए वक्त नहीं है बात करने के लिए। रोज उसका नंबर व्हाट्सएप पर चेक करता, उसको ऑनलाइन देखकर दिल अंदर ही अंदर बहुत जलता, उससे बात करने के लिए मेसेज भी करता , प्लीज बेबी, एक बार बात कर लो यार, दिल बहुत तड़प रहा है आप से बात करने के लिए। प्लीज मेरी जान , एक बार बात कर लो। कई दिनों तक उसे ऐसे ही मेसेज करता रहा , यह सोच कर कि शायद अब बात कर ले। उसका यही मेसेज आता कि मुझे अपने हाल पर छोड़ दो। बहुत कुछ करना है मुझे जिंदगी में, मेने अभी किया ही क्या हैं। व्हाट्सएप पर भी इसके अलावा और कोई बात नही होती।  उसने मुझे व्हाट्सएप से ब्लॉक कर दिया। मेरे नंबर भी ब्लैक लिस्ट में डाल दिए। अब मैं कर भी क्या सकत...